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पृथ्वी के नीचे विशाल समंदर की खोज, ढूंढने गए थे कहां से निकला पानी? मिली अनोखी कहानी

Scientists found huge Ocean below earth: धरती पर पानी की उत्पत्ति को लेकर लंबे समय से वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे थे।आखिरकार वैज्ञानिकों को अपनी खोज में सफलता मिल गई हैं। वैज्ञानिकों ने पृथ्वी की परत के नीचे छिपे एक विशाल महासागर के बारे में पता लगाया हैं।जहां पानी पृथ्वी की सतह से 700 किलोमीटर नीचे स्पंज की तरह काम करने वाली रिंगवुडाइट चट्टान में जमा होता है।
09:00 PM Apr 03, 2024 IST | News24 हिंदी
पृथ्वी के नीचे विशाल समंदर की खोज  ढूंढने गए थे कहां से निकला पानी  मिली अनोखी कहानी
सबसे बड़े महासागर की खोज

Mysteries Ocean discover Scientists found huge Ocean 700 km below earth surface: वैज्ञानिकों ने पृथ्वी के नीचे एक विशाल महासागर के अस्तित्व का खुलासा किया है। रिसर्च दल की टीम को पृथ्वी की सतह से 700 किमी नीचे पानी का अथाह भंडार मिला है ।अगर इस विशाल महासागर के आकार की बात करें तो यह धरती के सभी महासागरों से तीन गुना बड़ा है।

रिंगवुडाइट एक स्पंज की तरह करता है काम

बतादें कि इवान्स्टन, इलिनोइस में नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक पानी की उत्पत्ति का पता लगा रहे थे। पानी कहां से निकाला पानी की उत्पत्ति का कारण क्या है। इसकी खोज करते-करते वैज्ञानिकों को पृथ्वी की सतह से 700 किलोमीटर नीचे रिंगवुडाइट की नीली चट्टान के भीतर छिपा हुआ विशाल महासागर मिल गया। रिसर्च दल में शामिल स्टीव जैकबसेन ने रिंगवुडाइट को एक स्पंज की तरह बताया है। स्टीव जैकबसेन के अनुसार रिंगवुडाइट की क्रिस्टल संरचना कुछ इस तरह की बनीं हुई है जो कि पानी को सोख लेता है।

रिसर्च दल के सदस्य स्टीव ने दी जानकारी

स्टीव जैकबसेन ने कहा कि उन्हें लगता है कि वो पूरी पृथ्वी के जल चक्र के सबूत को देख रहे हैं,जो इंसानों के रहने योग्य ग्रह की सतह पर तरल पानी की विशाल मात्रा के बारे में समझाने में हमारी मदद करता है। वहीं पृथ्वी के 410 किमी से लेकर 660 किमी की गहराई में मेंटल संक्रमण एरिया में खनिजों की उच्च जल भंडारण क्षमता एक गहरे H2O भंडार की संभावना को दर्शाती है।जो horizontal रूप से बहने वाले मेंटल के निर्जलीकरण और पिघलने का कारण बन सकती है। वैज्ञानिकों ने कहा, हमने उच्च दबाव वाले प्रयोगशाला प्रयोगों, संख्यात्मक मॉडलिंग और भूकंपीय पी-टू-एस रूपांतरणों के साथ संक्रमण क्षेत्र से निचले मेंटल में डाउनवेलिंग के प्रभावों की जांच की। जो इस बात का पर्याप्त सबूत है कि पृथ्वी पर पानी की उत्पत्ति अंदर से ही हुई है ।

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